MYTHOLOGICAL | STORIES

कर भला, तो हो भला।

mythological stories

आइये पढ़ते है, भगवान् श्री कृष्ण और उनके सखा अर्जुन की कहानी। भगवान् श्री कृष्ण और अर्जुन एक बार गांव से जा रहे थे, तोह उन्होंने देखा की एक साधु घर- घर जाकर भिक्षा मांग रहा था। अर्जुन को उन पर दया आ गयी और उनको बुलाया और एक सोने के सिक्को की पोटली दे दी। उनसे कहा की आपको अब भिक्षा मांगने की जरूरत नहीं है, अब आप पूरी ज़िन्दगी आराम से ज़ी सकते है। साधु ने अर्जुन को धन्यवाद किया और भगवन को प्रणाम करके घर चल दिए। घर जाते समय साधु को लुटेरे मिल गए और उनसे पैसे छीन लिए। साधु बहुत दुखी होआ और ये सब बात घर जाकर अपनी पत्नी को बताई।

अगले दिन, साधु फिर से भिक्षा मांगने लगा, और फिर कृष्ण जी और अर्जुन निकलते होए उन पर नजर पड़ी और उन्होंने साधु से पुछा की- आप अब भिक्षा क्यों मांग रहे है, तब साधु ने उन्हें पूरी बात बताई। अर्जुन को उन पर फिर से दया आ गयी और उन्होंने एक अनमोल हीरा उनको दे दिया और कहा की अब आप घर जाइये और अपना आराम से जीवन यापन कीजिये। साधु बड़े खुश होकर घर चले गए।

साधु की पत्नी पानी लेनी गयी होइ थी, साधु ने हीरा एक पुराने से मटके में रख दिया, जिससे किसी चोर को शक न हो। और साधु सोने चले गए, इतने में साधु की पत्नी जो मटके में पानी लेने गयी थी, वो मटका फूट गया और वो घर से पुराना मटका लेकर पानी भरने चली गयी।

जब साधु की पत्नी घर आई तो देखा साधु बहुत उदास थे, क्यूंकि जिस मटके में उन्होंने उनकी ज़िन्दगी बदल देने वाला हीरा रखा था, उनकी पत्नी उसे लेकर पानी ले आई थी और हीरा पानी में डूब गया था।

साधु उदास होते होए अगले दिन फिर से, भिक्षा मांगने चला गया और कुछ दिन ऐसा चलता रहा और फिर एक दिन भगवन श्री कृष्ण और अर्जुन ने उनको देखा और उनसे पुछा की क्या होआ तब उन्होंने उनको मटके की घटना बताई।

तब अर्जुन ने श्री कृष्ण से पुछा ये कैसी लीला है आपकी, इन साधु के साथ ऐसा क्यू हो रहा है, अब आप ही कुछ करो। तब भगवन कृष्ण ने साधु को दो सिक्के दिए और कहा की अब आप घर चले जाइये, सब कुछ सही हो जाएगा।

साधु ने भगवान् की बात मानकर घर जाने लगे और सोचने लगे की- भगवान् से अच्छे तो उनके सखा थे जिन्होंने मुझे इतनी अनमोल चीज दी थी और यह श्री कृष्ण ने बस दो सिक्के ही दिए है।

इतने में रास्ते में साधु को एक मछवारा मिला जो एक मछली को लेकर जा रहा था, साधु को उस मछली पर दया आ गयी और उन्होंने उस मछली को दो सिक्के देकर खरीद लिया और अपने कमंडर में डाल दिया। साधु नदी में जैसे ही मछली डालने जा रहा था तोह उन्होंने देखा की उनके कमंडर में वही हीरा था, जो नदी में डूब गया था और वो मछली के पेट में था जो उन्हें मिल गया।

साधु बार बार बोलना लगा की – मिल गया, मिल गया। पास से, वही लुटेरा जा रहा था और उसको लगा की साधु ने उसको पहचान लिया है और अब वो ये बात राजा को बोल देगा, लुटेरा साधु के चरणों में पड़ गया और साधु को सोने की सिक्को की पोटली वापिस कर दी।

ये सब देख कर अर्जुन ने श्री कृष्ण से पुछा- भगवन ये कैसी लीला है, मैने सोने की सिक्के दिए और हीरा दिया और वो दोनों चीज ही साधु के पास से चली गयी और अब अपने दो सिक्के दिए, जिससे वो सब चीज उनके पास वापिस आ गयी।

भगवान् श्री कृष्ण बोले – की पहले दो बार जब तुमने उनको दिया था, तब वो साधु सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था।
लेकिन इस बार, साधु ने दूसरे के बारे में सोचा और उसको बचा लिया और ये सब उसको वापिस मिल गया। जब हम सिर्फ अपने बारे में ही सोचते है, तोह हमारा भला होना निश्चित नहीं है और जब हम दूसरे के भले के लिए सोचते है तोह वही हमारा कर्म वापिस- फल बनकर हमे मिलता है।

इसीलिए हमेशा हमे सबके भले के बारे में सोचना चाहिए और जैसे भी हो सके, दूसरो की मदत करते रहना चाहिए।

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