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कब आऊँ

short moral kids stories in hindi

आकाश ने एक छोटी सी रंगीन की दुकान खोली और गॉव वाले के लिए कपड़े रंगना शुरू कर दिया। सभी गॉव वाले उसकी रंगाई की काफी तारीफ करते थे। आकाश की तारीफ सुनकर एक सेठ को बहुत ईर्ष्या होने लगी।

आकाश को परेशान करने के लिए वो सेठ एक कपडे का टुकड़ा लेकर उसकी दुकान पर पंहुचा। सेठ ने दुकान में घुसते ही आकाश ने बोला- जरा हमारा कपडा भी रंग दो। में देखना चाहता हु तुम्हारा हुनर कैसा है। तुम्हारी बहुत तारीफ़ सुनी है गॉव में, इसीलिए यहाँ आया हूँ।

आकाश ने सेठजी से पुछा – सेठजी, इस कपडे को आप किस रंग में रंगना चाहते है ?
सेठ ने कहा – रंग ? रंग के बारे में मेरी कोई ख़ास पसंद तोह नहीं है, बस मुझे लाल, सफ़ेद, हरा, पीला, नीला, काला, नारंगी, आसमानी और बेरंगी रंग बिलकुल अचे नहीं लगते। समझे की नहीं?

आकाश ने जवाब दिया – समझ गया हूँ, अच्छी तरह समझ गया हूँ। में जरूर आपकी पसंद की रंगाई कर दूंगा। आकाश ने सेठ का मन भांपते होए उसके हाथ से कपडे का टुकड़ा ले लिया।

सेठ ने खुश होते होए कहा – अच्छा, तोह इसको लेने में किस दिन आऊँ?
आकाश ने कपडे को आलमारी में बंद करके उसमे ताला लगा दिया और सेठ से बोला – आप इसे सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार को छोड़कर किसी भी दिन आ सकते हो।

सेठ समझ गया की उसकी चाल उल्टी पड़ गयी है अतः भलाई धीरे से खिसक लेने में ही है। फिर उस सेठ ने दोबारा कभी आकाश की दुकान पर घुसने की हिम्मत नहीं की।

Moral of the Story- अगर कोई इंसान आपकी कामयाबी से जलकर आपकी टांग खींचने आए तोह उसके साथ ऐसा ही करना चाहिए जैसे आकाश ने किया। जैसे को तैसा। गलत करना तोह गलत होता है पर गलत सहना भी गलत होता है।

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